रोटी और मजहब का क्या रिश्ता

रोटी और मजहब का क्या रिश्ता
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रोटी नहीं मुझे मज़हब दो,
इंनसानियत नही राजनीति दो,
हिंदू, सुसलमान, इसाई सही, मुझे मजहबी बना दो,
सनातन नही, लाठी, तलवार, बम दो,
यह भूख मेरा मुझे भूख मिटाने दो।

दंगा में जो खून था,
आँसू और आग मजहब का था?
निर्दोष सब कानून का मानना,
गुनाह, आग, खून और आँसूओ का,
रोटी, सही मे येतो बनता है खून,आँसू और आग का।

जाना नहीं कभी गोधरा, 
नहीं मना करूंगा जाना मंदिर, मस्जिद और गिरजा, गुरुद्वारा,
यकीन मानो, नफरत है मुझे, वंहा बैठे मालिक जिसके हाथ में रोटी है ज्यादा।

झोपड़ पट्टी और गांव बसेरा,
रोटी का, वहां रहते हैं भूखा ज्यादा,
शासन प्रशासन एक दुकान, रोटी का
खेल भूखा का नही, रोटी वाले का।

मिला नही मुझे सरकारी खाता,
भिखारी उसी दिन बनूंगा जब सरकार खोलेगा मेरा खाता,
मजहब नहीं मुझे रोटी दो,
वोट लो, मुझे मजहब से ना जोड़ो
भाई, बताओ रोटी और मजहब का क्या रिश्ता।

द्विट डेभीड फिलिप
(Edited by Shri Anurag Kujur, Ranchi)
चइबशा, वेस्ट सिंहभूम
झारखण्ड, इंडिया
klddavid@rediffmail.com
९४३७१०४३०३

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