Saturday, April 30, 2022
मुसहर नहीं मैं मांझी जी
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बुलाओगे कब तक मुझे मुसहर जी,
खुद कमाके खाता हूं मुसहर नही हूं जी,
राष्ट्र का खाके जितन राम मांझी जी,
मुझे भी बुलाओ, मांझी जी, मैं मुसहर नहीं जी।
नीचा दिखाने का ये है चाल तुम्हारी,
नहीं कोई जात बकरीहारी, मुर्गिहारी, मछलीहारी ।
वेद एक चक्रव्यूह भारत में बर्न और जात पात का,
जल, जंगल, भूमि में था सबका अधिकार,
चाल तुम्हारा, कर दिए जमीन और जागीर को अपना अपना,
खनीज आज कैसे हुआ बनिया और वैश्य का।
तंत्र और व्यवस्था, सब हड़पने का एक चाल,
मांझी जी को, मुसहर बुलाना भी एक चाल ।
द्विट डेविड फिलिप
लहेरी थाना
बिहारशरीफ, नालंदा, बिहार
८०३१०१,
९४३७१०४३०३