इस बार भी दीया नहीं जलापाए

इस बार भी दीया नहीं जला पाए 
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मेरे पास दीप नहीं,
तेरे पास, जलता नहीं,
उसके पास, तेल नहीं,
उनका कोई घर है नहीं,
इसका, पॉलिथीन का घर, आँगन नहीं।

आइए गाएं, भगवान के लिए यही गीत,  
आशीर्वाद मिलेगा तो आने वाले वर्ष हमारे घर मे भी जलेगा दीप

"दीपांग ज्योत परमब्रह्म,
दीपांग ज्योत जनार्दन,
दीपांग ज्योत हराते पापंग, दीपांग ज्योत नमस्ते।"

"तमसो मा ज्यतिर्गम्यो,
असतो मा सद्गम्यो,
मृत्यु मेरा अमृत है।
ओह शांति, शांति, शांति।"

दीपों के इस पावन पर्व पर आप और आपके परिवार के सभी सदस्यों का जीवन उज्ज्वल हो!

आप सौभाग्यशाली हों।

गली बच्चों के साथ,
(With street children)
डूइट डेविड फिलिप्
चाईबासा, झारखंड
24/10/20 22
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